साईं संधेया दी आई

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॥ पावन पाठ ॥

साईं संधेया दी आई सोहनी रात साईं साईं बोलते रहिये,

बेठी साईं गुण गौन्दी तेरे भगत ने प्यारे,

साईं गूंजी दे जयकारे दिन रात,

साईं साईं बोलदे रहिये,

साईं संधेया दी आई सोहनी रात साईं साईं बोलते रहिये,

शिर्डी दे साईं ने अज है संदेया दे विच औना,

कर के सैयां दर्शन तेरा जीवन सफल बनाउना,

साईं नाम है सब तो प्यारा बोलदे रहिये,

साईं संधेया दी आई सोहनी रात साईं साईं बोलते रहिये,

नाम तेरे विच सब है रांगेया काएनात भी सारी,

साईं दे भगता नु चड गी साईं नाम खुमारी,

चलदे फिरदे हर था साईं बोलदे रहीये,

साईं संधेया दी आई सोहनी रात साईं साईं बोलते रहिये,

छड के सारी दुनिया दारी साईं नाम विच रंग जा,

मोह माया नु त्याग दे बंदे सेवक इस दा बन जा,

छड के झूठे बंधन साईं,बोल दे रहिये,

साईं संधेया दी आई सोहनी रात साईं साईं बोलते रहिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।