नरसी बोले अरज सुनो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भक्तों पर कृपा करें , साँवल शाह सरकार

भात भरण को आ गए , जब नरसी करी पुकार

नरसी बोले अरज सुनो , है गोवर्धन गिरधारी

नानी बाई बाट निहारे , राखो लाज हमारी

सिरसा गढ़ से है , मनमोहन भात की चिट्ठी आई

पढ़ पढ़ कर मेरा मन घबरावे , प्यारे कृष्ण कन्हाई

सब भक्तों की लाज बचाई ……...

आज है मेरी बारी

टूटी फूटी गाड़ी मेरी , कैसे पहुंचा जाए

साथ नहीं कोई गढ़ वाला , गाड़ी कौन चलाएं

नाव डूबी कौन बचाए ………...

तुम बिन बृज बिहारी

बिन भाई के बहन अकेली मेरी लाडली नानी

करके याद रोवती होगी , भर आंख्या में पानी

आज बदल दे करम कहानी ………..

आजा कृष्ण मुरारी

एक भरोसा तेरा है , घनश्याम मुरलिया वाले

भूलन त्यागी कहे श्याम , बहुत के संकट ताले

आज मुझे भी आन बचाले ………...

हरीश पड़ा शरण में थारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।