हथ जोड़ अरदास करा

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॥ पावन पाठ ॥

हथ जोड़ अरदास करा सब दा भला चाहवा,

शुकर करा तेरा दतेया जे मैं कम किसे दे आवा,

हथ जोड़ अरदास करा सब दा भला चाहवा,

सुख विच नीवा होके जीवा दुःख विच सबर न छडा,

अपने लई की मंगना झोली होरा दे ली अड़ा,

इस जोगा कर दास नु पासे न पस्तावा,

शुकर करा तेरा दतेया जे मैं कम किसे दे आवा,

दिल न दुखावा किसे दा भी मैं कदे न मंगडा बोला,

जद भी मुह अपना मैं खोला रब तो दरके खोला,

पल पल एहो वेंटी मैं कदे न इत्रावा,

शुकर करा तेरा दतेया जे मैं कम किसे दे आवा,

रोज दुआवा मंगियाँ तेथो एहो सतगुरु प्यारे,

हसदे वसदे रैन हमेशा अपने पराये सारे,

अपने पराये विच कोई फर्क न मैं पावा,

शुकर करा तेरा दतेया जे मैं कम किसे दे आवा,

साहिल दे दिल दे अन्दर अंश अपना भरदे,

घोर हनेरे नु तू चानन चानन करदे,

बनके हमेशा मैं रवा तेरा भी परशावा,

शुकर करा तेरा दतेया जे मैं कम किसे दे आवा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।