नया साल माँ नाल मनबांगे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज नवा साल माँ न मनावागे,

नाले नच नच भेटा गवागे,

आज नवा साल माँ न मनावागे,

शेरावाली माँ चिठियाँ पा पा सब नु आप बुलावे,

वैष्णो रानी सब भगता दे सुते भाग जगावे,

माँ दे चरना च शीश झुकावा गे,

आज नवा साल माँ न मनावागे,

रंग बिरंगी चुनियाँ लेके भगत ने दर ते आउंदे.

मेहरा वाली पिंडी वाली दे रज रज दर्शन पौंदे,

रंग भगती दा सब नु चडावा गे,

आज नवा साल माँ न मनावागे,

नवा साल माँ भगता दे लई कर्मा वाला आया,

सोहनी गुफा ते भगता ने आके डेरा लाया,

भेटा पंकज पीनके नाल गावा गे नीले नाल भी गावा गे,

आज नवा साल माँ न मनावागे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।