मेरे खुदा मेरे प्रभु अपनी शरण में लेले तू

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे खुदा मेरे प्रभु अपनी शरण में लेले तू

सारा जग अंद्यारा है तू ही इक हमारा है,

राह मे हम भटक न जाए तू ही इक सहारा है,

मेरे खुदा मेरे प्रभु अपनी शरण में लेले तू,

तेरी किरपा से मेरे प्रभु हम आये इस दुनिया में,

जब तक हम याहा पे रहे छूटे न हाथ तुम्हारा प्रभु,

मेरे खुदा मेरे प्रभु अपनी शरण में लेले तू,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।