अज नवा साल जोगी नाल मनावागे

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॥ पावन पाठ ॥

अज नवा साल जोगी नाल मनावागे,

पौनाहारी मेरे बाबा जी ने सब नु आप बुलाया,

हर कोई लाल रंग दा झंडा लेके दर ते आया,

सोनी गुफा दे दर्शन पावा गे,

अज नवा साल जोगी नाल मनावागे,

सिद्ध जोगी मेरा सिंगियाँ वाला वेडे बने लाउंदा,

जो भी श्रदा दे नाल आवे सुते भाग ज्गौन्दा,

रंग भगती दा सब नु चडावा गे,

अज नवा साल जोगी नाल मनावागे,

मस्ती दे विच मस्त है होके भगत जयकारे लाऊं दे,

शाह तलैयां लगियां रोंका धो भी दर दे ब्जौंदे,

भेटा पिंके नाल वी गावागे नच नच हाजरी लावा गे,

अज नवा साल जोगी नाल मनावागे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।