साइयो मैं ता धमाला पावा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कोई अर्श फर्श ते पना दी मेरे शिव शंकर दी है शादी,

लाडा बनेया है मेरा भोला नाथ साइयो मैं ता धमाला पावा,

नील कंठ महाराज शिवा दे सोहने सेहरे लाये,

देवी देवते भुत बाराती बन भोले दे आये,

आज सज गई सारी बारात साइयो मैं ता माला पावा,

लाडा बनेया है मेरा भोला नाथ साइयो मैं ता धमाला पावा,

हर मुखड़े ते नूर है छाया गाउँदे जान जैकारे,

लोग जहाना विच होइयाँ खुशियां बज्दे ढोल नगाड़े,

आई शगना वाली रात साइयो मैं ता माला पावा,

लाडा बनेया है मेरा भोला नाथ साइयो मैं ता धमाला पावा

रंग विच रांगेया होया सोहना पी के भंग दा प्याला,

दुरो चमका मारे गल विच फनियर नाग निराला,

जटा विचो करे गंगा बरसात साइयो मैं ता माला पावा,

लाडा बनेया है मेरा भोला नाथ साइयो मैं ता धमाला पावा,

जिस दी महिमा विच अड्डी वाला कलम चलाउँदा,

झुक झुक करे सलाम शिवा नु रमन सूफी गुण गाउँदा,

आज नचना मैं सारी रात साइयो मैं ता माला पावा,

लाडा बनेया है मेरा भोला नाथ साइयो मैं ता धमाला पावा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।