रंगा विच रंग जाइये शेरावालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ढोल वजाउंदे आइये शेरावालिये रंगा विच रंग जाइये शेरावालिये,

मिठिया मुरादा पाइये शेरावालिये,

रंगा विच रंग जाइये शेरावालिये,

श्रद्धा भगति प्रेम बना के नाम गंगा विच ताड़ियाँ ला के,

नचिये नचाइये आज शेरावालिये,

रंगा विच रंग जाइये शेरावालिये,

झंडे झूलन बजदियां कलियाँ,

माँ तू नजरा करे सवालियां,

तेरे दर्शन पाइये शेरावालिये ,

रंगा विच रंग जाइये शेरावालिये,

रंगले अजब नजारे दर दे,

सजदे सुख दीप जाहे दर ते,

सर जीवन भेटा गाइये शेरवलिये,

रंगा विच रंग जाइये शेरावालिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।