ओहदा बाल वींगा नहीं हो सकदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तनु ही ध्याइये सदा हे महारानिये,

अपना बना ले साहनु शाह दी शाहनिये,

तू कर किरपा हल देदे तू मेरे बिगड़े होये सवाल दा

ओहदा बाल वींगा नहीं हो सकदा जिद्दी रखवाली माँ कालका,

रक्त बीज का रक्त तू बीजा रक्त दता तनु कहन्दे माँ,

तेरे भगत प्यारे अमिए नाम सदा तेरा लेंदे माँ,

तू भगत जना ते आई होइ हर विपदा देवे टाल माँ

ओहदा बाल वींगा नहीं हो सकदा जिद्दी रखवाली माँ कालका,

काल रात्रि माये कालड़ी तेरे कोलो डरदा है,

सूरज भी माँ सब तो पहला तेरी हाजरी भरदा है,

माये आपने मेतो दूर करि सब मोह माया दे जाल दा,

ओहदा बाल वींगा नहीं हो सकदा जिद्दी रखवाली माँ कालका,

कलम दे नाल माँ मेहमा तेरी करदा रहे वयान माँ,

नाम तेरा ले हर सुख मिलिया मिली मैनु पहचान माँ,

तेरा लाल भसीन अम्बरसरियाँ ओहदा रखी सदा ख्याल माँ,

ओहदा बाल वींगा नहीं हो सकदा जिद्दी रखवाली माँ कालका,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।