देवी तलाब भी दुनिया अंदर तीर्थ है महामाई दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देवी तलाब भी दुनिया अंदर तीर्थ है महामाई दा,

सिद्ध पीढ़ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल जुकाई दा,

लक्ष्मी काली वैष्णो माता मंदिर दे विच वास है,

त्रिपुर मालनी रूप सती दा पूरी करदा आस है,

भगति दा वर लेके माँ तो जीवन सफल बनाई दा,

सिद्ध पीढ़ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल जुकाई दा,

सोहने दा एह मंदिर सोहना भगता रल बनवाया है,

तन मन धन नाल सेवा करके जो चाया सो पाया है .

आओ असि भी मंदिर चलिये मौका नहीं गवाई दा,

सिद्ध पीढ़ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल जुकाई दा,

परिकर्मा विच शिव दे भगता शिवलिंग कई सजाये ने,

शिवशक्ति दी महिमा देखन देवी देवते आये ने,

जिस नु मिल जाए ऐसा द्वारा ओहनू होर की चाहिदा,

सिद्ध पीढ़ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल जुकाई दा,

भगत प्यारे शुक्र वार नु माँ दी चोंकि करदे ने,

खीर दा भोग लगा के दर्शी वरुण हाजरी भरदे ने,

माँ दी रजा विच रह के राजी माँ दा शुक्र मनाई दा,

सिद्ध पीढ़ ते आके सिर नु श्रद्धा नाल जुकाई दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।