डम डम डमरू वजे शिवा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डम डम डमरू, वजे शिवा, तेरी नगरी ll

तेरी नगरी, मणि महेश शिवा, तेरी नगरी ll

डम डम डमरू, वजे शिवा,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ ने गड़वा, गंगा जल पानी ll

स्नान करावण, चले शिवा, तेरी नगरी,

तेरी नगरी, मणि महेश शिवा, तेरी नगरी ll

डम डम डमरू, वजे शिवा,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ में धूफ, धूफ की बत्तियाँ ll

धूफ धुखावण, चले शिवा, तेरी नगरी,

तेरी नगरी, मणि महेश शिवा, तेरी नगरी ll

डम डम डमरू, वजे शिवा,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ में किरण्डू, फुल्लां नाल भरिया ll

हार पहनावण, चले शिवा, तेरी नगरी,

तेरी नगरी, मणि महेश शिवा, तेरी नगरी ll

डम डम डमरू, वजे शिवा,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ में थाली, भोजन वाली ll

भोग लगावण, चले शिवा, तेरी नगरी,

तेरी नगरी, मणि महेश शिवा, तेरी नगरी ll

डम डम डमरू, वजे शिवा,,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोडर= अनिलरामूर्तीभोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।