श्याम ही साँसों मे बस्ते

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम ही साँसों मे बस्ते

श्याम ही धड़कन

श्याम की ही है अमानत

अपना ये जीवन

श्याम ही दृष्टि हमारी

श्याम ही दर्शन

शयम् ही जिव्हा मे बस्ते

श्याम ही सुमिरन

श्याम ही माता पिता है

श्याम ही भगवान

श्याम ही पूजन हमारा

श्याम ही वंदन

श्याम फूलों की माहेक है

श्याम ही है रंग

श्याम ही हर सुख हमारा

श्याम ही आनंद

श्याम ही पूंजी हमारी

श्याम अपना धन

श्याम से प्रीत सोनू

श्याम से संबंध

श्याम ही साँसों मे बस्ते

श्याम ही धड़कन

श्याम की ही है अमानत

अपना ये जीवन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।