जय दादी की

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की..

दादी दादी जपेजा सुबहो शाम भगत सुख पायेगा दादी संग में..

दादी संग में रहेगी अर्थोयाम भगत सुख पायेगा

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की..

सारे जग की सेठानी यें, झोली सब की भर्ती

चुनड़ी के पल्ले से दादी सुख की वर्षा करती तेरे हर लेगी..

तेरे हर लेगी दुखड़े का मान भगत सुख पायेगा,

दादी दादी जपेजा सुबहो शाम भगत सुख पायेगा,

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की..

झूठे सारे जग के नाते सुख में साथ निभाएं

संकट के घड़ियों में लेकिन दादी दौड़ी आये सांचा सांचा है..

सांचा सांचा है दादी जी का नाम भगत सुख पायेगा,

दादी दादी जपेजा सुबहो शाम भगत सुख पायेगा,

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की..

अनधन लक्ष्मी खूब मिलेगी और सम्मान मिलेगा

गर तेरे ह्रदय में दादी जी का ध्यान मिलेगा अपने मन को..

अपने मन को बनाले दादी धाम भगत सुख पायेगा,

दादी दादी जपेजा सुबहो शाम भगत सुख पायेगा,

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की..

छोड़के सारी चिंता सूरज दादी के गुण-गाले

जीवन की नईया को करदे मईया के हवाले दादी पूरण..

दादी पूरण करेगी हर काम भगत सुख पायेगा,

दादी दादी जपेजा सुबहो शाम भगत सुख पायेगा,

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की..

दादी दादी जपेजा सुबहो शाम भगत सुख पायेगा दादी संग में..

दादी संग में रहेगी अर्थोयाम भगत सुख पायेगा

जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की.. जय दादी की

जय दादी की,जय दादी की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।