यमुना के तट पर मारी नजरियाँ एसी सांवरियां ने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

यमुना के तट पर मारी नजरियाँ एसी सांवरियां ने,

घ्याल हो गई पल में के गजरा गिर गया यमुनाजल में,

लेने गगरियाँ गई थी बजारियां,

बजारियां में मिल गया वो बांके सांवरियां,

गगरी मेरी छीन के उसने बाईया मरोड़ी,

बाई यु मरोड़ के पूछे क्या मर्जी है तेरी,

फिर ऐसे मैं शरमाई निकला वो तो हरजाई,

चली गई इक पल में, के गजरा गिर गया यमुनाजल में,

यमुना के तट पर मारी नजरियाँ एसी सांवरियां ने

प्रीत में उसके एसी खोई ना मैं जागी ना मैं सोई,

मेरा अंचल पायल का जल तीनो कर गया घ्याल,

थर थर काँपे मेरी काय ढोल रह मेरा मन,

फिर कांटे कटे न वो नैना वैरी छीन के लै गयो छैना,

छली गई इक पल में गजरा गिर गया यमुना जल में,

यमुना के तट पर मारी नजरियाँ एसी सांवरियां ने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।