चार महासू देवा बडे प्या‍रे लागदे

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॥ पावन पाठ ॥

चार महासू देवा बडे प्या‍रे लागदे कौ,

सारे कष्ट मिटाये घर घर आइेके

बोठा चालदा बाशिक पवासी चार भाई हो.

चार महासू बेटे देवलाडी माईके कौ

दानव किरमिर कांवतिया शामूशाही मारा तें,

धर्मी आछे आदमी के देवा घर भरे तें,

सारे दुख मिटाये तेरी पुर्जी लाइके कौ

चार महासू देवा, बडे प्या रे लागदे ,

चार महासू देवा

तेरे धाम आइके तेरी रात जागदे ,

साची अर्जी लाइके, सारे दोष भागदे ,

सारे दोष मिटे, तेरी शरण आइके कौ

चार महासू देवा, बडे प्या रे लागदे ,

चार महासू देवा

तेरी कृपा से देवा सारे काम बंणदे,

सारा जौनसार देवा तेरी मानता करदे ,

बीती चांई जिन्दमगी, तेरे भजन गाइके कौ

चार महासू देवा, बडे प्या,रे लागदे ,

चार महासू देवा--

गायक विकास रघुवंशी (दिल्‍ली)

सम्‍पर्क: 9910764844

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।