भगती कर भगवत कीभाई

-स्वामी सदानन्द जोधपुर
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भगती कर भगवत की भाई

भगती कर भव पार उतरले , जीव परम पद पाई।

भगती कीवी ध्रुव भगत ने,जा कर वन रे मांही।

अटल राज प्रभुजी ने दीना,कीवी सफल कमाई।

भगत प्रहलादो रटे राम ने,हिरणा कुछ दुःख दाई।

नरसिंह रूप धार हरी आए,नख से दियो मराई।

सोरे री गढ लंका जारे,सात समन्द सी खाई।

रावण सरीखे चले गए बंदे,तेरी क्या ठहराई।।

भुगते जीव भजन बिन जग मे,लख चोरासी मांही।

"सदानन्द" कहे सुणो हरी भगतो,अवसर बीतो जाई।

रचनाकार:-स्वामी सदानन्द जोधपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।