ओ मेरे सांवरे सलोने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्क ओ उड़े जब जब जुल्फें तेरी

ओ मेरे साबरे सलोने आजा,ओ मेरे साबरे सलोने आजा

कि वंशी कही ना बजी,ओ वंशी कही ना बजी ओ मेरे सांवरे,

जब ऐसी भोली सूरत ओ, जब ऐसी भोली सूरत

तो नजर कैसे हट जाएगी ओ मेरे साबरे

रूत रास रचन की आई , ओ रूत रास रचन की आई

कि मधुवन आजा साबरे ओ मेरे साबरे

कभी मेरे घर भी आना आन ,ओ कभी मेरे घर भी आना

की तक तक नैन थक गए ओ मेरे सांवरे

उस गांव पर स्वर्ग भी सदके, ओ उस गांव पर स्वर्ग भी सदके

कि वो तेरा गोकुल गांव है ओ मेरे सांवरे

माखन खाने के बहाने आजा ,ओ माखन खाने के बहाने आजा

कि तेरा इंतजार करूं ओ मेरे सांवरे

यशोदा से शिकायत करने के बहाने देखूं ,ओ तेरी शिकायत करने के बहाने देखूं

तू मटकी फोड़ जा सांवरे ओ मेरे सांवरे

अब पकड़ेंगी गली की सब ग्वालन ,ओ पकड़ेंगी गली की सब ग्वालन

कि काना कहीं छुप जा रे ओ मेरे सांवरे

तुम चलते ठुमक ठुमक कर ,ओ तुम चलते ठुमक ठुमक कर

कि कान्हा नजर तुम्हें लग जाएगी ओ मेरे सांवरे

तुम जाओ कहीं भी काना ,ओ तुम जाओ कहीं भी काना

की पीछे पीछे हम आएंगे ओ मेरे सांवरे

ओ मेरे सांवरे सलोने आजा ,ओ मेरे सांवरे सलोने आजा ,,,,,,,,,,,,,,,

लेखक = आलोक आचार्य

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।