जब जब देखु दादी तुमको आता है ये ख्याल क्यों

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॥ पावन पाठ ॥

जब जब देखु दादी तुमको आता है ये ख्याल क्यों,

नजरे उतार दू नजरे उतार दू,

जब जब देखु दादी तुमको आता है ये ख्याल क्यों,

भोला भाला चाँद सा मुखड़ा देख दीवाना हो जाउ,

नजरे नहीं हट ती तुम पर से दिल करता देखे जाउ,

मन करता नैनो के रस्ते दिल में तुझे उतार लू,

नजरे उतार दू नजरे उतार दू,

जब जब देखु दादी तुमको आता है ये ख्याल क्यों,

तेरे रूप के आगे फीके लगते सभी नजारे है,

सुंदरता में तुमसे हारे सारे चाँद सितारे है,

दिल ही नहीं भरता चाहे मैं सो सो बार निहार लू,

नजरे उतार दू नजरे उतार दू,

जब जब देखु दादी तुमको आता है ये ख्याल क्यों,

कहते है अपनों की नजर ही सब से पहली लगती है,

नजर न लागे मेरी मैया शंका दिल में रहती है,

यत्न करू क्या इस शंका का बतलादे इक वार तू,

नजरे उतार दू नजरे उतार दू,

जब जब देखु दादी तुमको आता है ये ख्याल क्यों,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।