नियत तेरी अच्छी है तो घर ही मथुरा काशी है

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॥ पावन पाठ ॥

कर्म तेरे अगर अच्छे है तो किस्मत तेरी दासी है,

नियत तेरी अच्छी है तो घर ही मथुरा काशी है,

कर न सको अगर पुण्य कोई तो कम से कम मत पाप करो,

दिल को चोट पहुँच जाए मत ऐसा किया कलाप करो,

इर्षा द्वेष नहीं करता जो वो गृहस्थ सन्यासी है,

नियत तेरी अच्छी है तो घर ही मथुरा काशी है,

झूठ कभी मत कहो किसी से हर दम सच की राह चलो,

बे मानी सी दूर रहो तुम हो कर बेपरवाह चलो,

ईश्वर अपनी सतनाओ से सत गुण का अभीलाषी है

नियत तेरी अच्छी है तो घर ही मथुरा काशी है,

लूट खसोट करो मत हरगिज क्या तुम ले जाओ गे,

गला काट कर इंसानो का आखिर तुम क्या पाओगे,

रोटा है सतिंदर अंजू जो लो लूप जो बिलाषी है,

नियत तेरी अच्छी है तो घर ही मथुरा काशी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।