मेरी वंदना बाबे नानक नु जी मेरी वंदना

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी वंदना बाबे नानक नु जी मेरी वंदना,

उस कुल दुनिया दे मालक नु जी मेरी वंदना,

कीरत करदा वंड छकाउँदा बाबे नानक दा हल वाहुंदा,

ओहनू चतो पैर ध्याउंदा हां ओहदे खेता नु पानी लाउंदा हां,

ओह ता हरे कर देवे लोको रुख जेहड़े सूखे ओहदा ना लाके दाने मैं जमीन विच सुटे

मेरी वंदना बाबे नानक नु जी मेरी वंदना,

दिता हर सुख बाबे नानक दा तंदरुस्ती बाबे नानक दी,

जेहड़ी हथ विच है जेहड़ी मुँह विच है ओ बुर्की बाबे नानक दी,

ओहदा दिता असि पाइये ओहदा दिता ही हंड्याइये वीह रुपीया दा व्याज असि तीन ढंग खाइये,

मेरी वंदना बाबे नानक नु जी मेरी वंदना,

सेवक दे पर्दे कज लेंदा ओ वल दी आग को रख लेंदा,

जेहड़ा ओट आसरा चूक लेंदा ओहनू कह के कख ते लख दिंदा,

मैं ओहदे नाम दा प्यारा मैं ओहदे नाम दा दीवाना ,

जीहदे सजे पास बाला खबे पास मर्दाना,

मेरी वंदना बाबे नानक नु जी मेरी वंदना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।