मेरे मन में निर्मल गंगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन में निर्मल गंगा हो,

तन श्याम के रंग में रंगा हो,

सुख-दुख की कोई परवाह न हो,

नित ध्यान हो बस श्री चरणों का,

प्रभु भक्ति के प्रेम सुधा रस में,

इस दुनियां का भी ध्यान न हो,

मन प्रेम उमंग में डूबा रहे,

बंसी की धुन हो कानों में,

प्रभु राम की मूरत नैनों में,

हनुमंत लाल की सेवा हो,

सब अपने कोई पराया न हो,

जीवन में भय का साया न हो,

बस प्रभु की कृपा हो जीवन में,

नित भक्ति की शीश पे छाया हो,

-अर्द्धचंद्रधारी राम त्रिपाठी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।