दर्शन बिन अंखियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दरशन बिन अंखियां तरस गई,

मईया आज ए अंखियां बरस गईं,

मैं जनम जनम का प्यासा हूं,

दुखिया इस जग से निराशा हूं,

मन में श्रद्धा विश्वास लिए,

नित तेरे दर पर आता हूं,

बस तेरा सहारा आस तेरी,

मां मेरी अंखियां छलक गईं,

दरशन बिन अंखियां तरस गईं,

तूं सारे जग की माता है,

तेरे जैसा कोई दानी नहीं,

सबके दुख तुम हरती हो मां,

आशाएं पूरी करती हो,

अब मेरी अरज भी सुन लो मां,

तेरे दर पर अंखियां बरस गईं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।