मुखड़ा जोगी दा दुरो चमका मारे

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मुखड़ा जोगी दा दुरो चमका मारे,

वेखन लइ ओहदा सोहना मुखड़ा चन भी चातिया मारे,

मुखड़ा जोगी दा दुरो चमका मारे,

बाल रूप विच बैठा होया देखो समाधि ला के,

धुप न लग जे पौणाहारी नु सब छा करदे आ के,

ॐ नमो शिवाये दा मन्त्र मुख दे विचो उचारे,

मुखड़ा जोगी दा दुरो चमका मारे,

इस मुखड़े नु वेख के रत्नो ममता दे विच डूभी गई,

धर्म दा पुत्र बना के उस नु विच ख़ुशी दे खूबी गई,

छोटी उम्र विच जोगी होया माँ जाए बलिहारी,

मुखड़ा जोगी दा दुरो चमका मारे,

जिस वाल जोगी तक लवे होर कोई ना आवे,

रोशन रेह्पे वाला इसदियाँ सिफ़्ता लिखदे जावे,

धर्म कोटि गल सिंगी पा के लुटदा फेर नजारे,

मुखड़ा जोगी दा दुरो चमका मारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।