छम छम नचना मैं छम छम नचना

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॥ पावन पाठ ॥

छम छम नचना मैं छम छम नचना,

पैरा विच घुंगरू पा के साई दे दर जाके बाबा दे दर जाके,

मैं नचना है साई दे मुहरे भावे वेखन पेके सोहरे,

किसे कोलो नहीं शर्माना साई नु अपने नाल नचाना,

जय जय कार बुला के,

साई दे दर जाके बाबा दे दर जाके,

साई ने मेरी गॉड भरी है मेरी किस्मत बहुत खरी है,

साई दा मैं उपकार नि भूलना बाबा दा दरबार नि भूलना,

नचना ढोल बजा के,

साई दे दर जाके बाबा दे दर जाके,

नचना रीजा नाल मैं नचना साई दे दर हर साल मैं नचना,

साई ने सुनिया हर फर्यादा साई ने करिया पूरियां मुरादा

नचना ढोल बजा के,

साई दे दर जाके बाबा दे दर जाके,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।