आज दादी जी से केहदो अपने दिल की बात

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॥ पावन पाठ ॥

आज दादी जी से केहदो अपने दिल की बात,

किस्मत वालो को मिलती है ये कीर्तन की रात,

आज दादी जी से केहदो अपने दिल की बात

प्रेम की भाषा को मेरी झुँझन वाली ही जाने,

अपने भगतो के दर्द को बस मेरी माँ की पहचाने,

इन से आज छुपाओ न तुम अपने हालत,

किस्मत वालो को मिलती है ये कीर्तन की रात,

भावना की भूखी दादी भाव से रीज जाती है,

प्रेम के बंधन की डोरी से मैया खींची आती है,

दादी के दरबार में होती करुणा की बरसात,

किस्मत वालो को मिलती है ये कीर्तन की रात,

तेरे विश्वाश को दादी कभी न टूटने देगी,

पुहंचकर आँखों से आंसू तुझसे दिल से लगा लेगी,

बिन्नू अपने जीवन में पाई है हर सौगात,

किस्मत वालो को मिलती है ये कीर्तन की रात,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।