उधो वो सांवली सूरत

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

उधो वो सांवली सूरत हमे दिल जान से बाहती है,

वो काले बाल माथे पे मुकट मोरन के पंखो का,

मगर कुंडल की कानो में झलक वो याद आती है ,

उधो वो सांवली सूरत हमे दिल जान से बाहती है,

गले पर माल की शोभा पीताम्बर की छठा तन पे,

वो बंसी की मधुर बोली हमे तन मन बुलाती है ,

उधो वो सांवली सूरत हमे दिल जान से बाहती है,

कटी में में खिला सुदर सजी ,मोतियन की लड़ी की,

वो नोपुर की ध्वनि पग में हमारा दिल चुराती है ,

उधो वो सांवली सूरत हमे दिल जान से बाहती है,

वो पल में रास की लीला,

वो यमुना तीर खेलन की,

वो ब्रह्मा नन्द की बाते सुमिरते रेन जाती है,

उधो वो सांवली सूरत हमे दिल जान से बाहती है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।