भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

भात सवेरे लईयो रे भईया,

है मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

मेरे माथे का टिका लईयो टीके पे रत्न चढ़ाइयो ,

लईयो सोने की जंजीर भात सवेरे लईयो रे भईया,

अरे मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

मेरी कमर की तकदी लईयो,मुठी पे रत्न झाड़ियों

लईयो सोने की जंजीर भात सवेरे लईयो रे भईया,

अरे मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

भैया कानो के कुण्डल लईयो झुमकी पे रत्न जड़ाईयो,

लईयो सोने की जंजीर भात सवेरे लईयो रे भईया,

अरे मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

भईया हाथो के चूड़ी लईयो कंगन में रत्न जड़ाईयो,

लईयो घने की जंजीर भात सवेरे लईयो रे भईया,

अरे मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

मेरे पैरो की पायल लईयो बिछुए पे रत्न जड़ाईयो,

लईयो सोने की जंजीर भात सवेरे लईयो रे भईया,

अरे मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

मेरी चुनरी साडी लईयो और सब का मान बडियो,

लईयो सोने की जंजीर भात सवेरे लईयो रे भईया,

अरे मेरे भईयाँ रघुवीर भात सवीरे लईयो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।