माहि वे जन्मो से तेरा मेरा प्यार है

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॥ पावन पाठ ॥

माहि वे जन्मो से तेरा मेरा प्यार है,

तेरा मिलना सच्चे दिल से रब जाने तेरा विस्वाश है,

माहि वे जन्मो से तेरा मेरा प्यार है

सांसो ही सांसो में जपु तेरा नाम रे,

मांगू तुझे रब से ना और काम रे,

रब तू मेरा सब तू मेरा तू ही तू मेरा संसार है,

माहि वे जन्मो से तेरा मेरा प्यार है

प्यार वाली बात पाके जाऊ कितनी दूर न,

खुद की नजर से न जाऊ कही दूर न.

रब तू मेरा सब तू मेरा तू ही तू मेरा संसार है,

माहि वे जन्मो से तेरा मेरा प्यार है

मन में उतारी मैंने तेरी तस्वीर है,

तुझसे शुरू हुई तुझपे खत्म है,

टूट जायेगे सांसो की डोरी जिंगदी दो तीन चार है,

माहि वे जन्मो से तेरा मेरा प्यार है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।