आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

करके शृंगार माँ का माँ की ज्योत जगाये गे.

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

लाल लाल चोला है हरी हरी चुडिया है,

मैया जी के माथे पे लाल बिंदियां सजायेंगे,

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

भेरो बाबा चवर डुले संग चले हर दम,

वीर बजरंगी से माँ की सेवा करेगे,

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

मैया जी के चरणों में ध्यान को लगा कर के,

इस मन मंदिर में अपनी माँ को बिठाये गे,

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

भेट चढ़ाये गे पान सुपारी नारियल,

मीठे मीठे मत वाले माँ को भजन सुनाएंगे,

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

लाखो माँ ने तार दिये हम पे थोड़ी मेहर करे,

आशीर्वाद मिल जाये तो हम भी तर जायेगे ,

आंबे मेरी कुल देवी इसे मिल कर मनाएंगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।