यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहा से

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॥ पावन पाठ ॥

सारे गांव में दादा तेरा रुतबा हो रहा से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहा से,

घोडा तेरा सफेद सवारी प्यारी लागे से ,

तेरी सूरत देखके दादा संकट भागया से,

तेरा सेवक सदा सुखी न धोखा हो रहा से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहा से,

तेरा जनम दिन मने दशेरा मेला ठाडा भरता,

तेरे दर पे जो आवे तू हाथ शीश पे धरता,

बारह गांव झुके धुनें पे मौका हो रहा से,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहा से,

चदर चढ़े पतासे चढ़े भेली कोई चढ़ावे,

देशी घी की ज्योत जगा के सब तेरे गुण गावे,

जम के नाचू कीर्तन में टोटा हो रहा से ,

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहा से,

नहीं जगह की कमी कई की किले में मंदिर तेरा,

कहे भूलें मेरे घर में भी मारो दादा फेरा,

कहे हरीश पालम का छोरा तेरा हो रह्या से

यो पालम का छोरा दादा तेरा हो रहा से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।