रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में

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॥ पावन पाठ ॥

रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में ,

नाचेगे मस्ती में हम गायेगे मस्ती में,

रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में ,

आज हैप्पी बढ़े हम बोले गे मेरे दादा को,

बड़ा सूंदर केक बनाया झूम के नाचेंगे मस्ती में,

रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में ,

भजे ढोल नगाड़े मंदिर में मेरे दादा के,

सिर सूंदर मुकट सजाया झूम के नाचेंगे मस्ती में,

रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में ,

दरबार सजा गुबारों से मेरे दादा का,

बनडा सा इसको बनाया झूम के नाचे गे रे मस्ती में,

रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में ,

हम बेहली चक्र चढ़ाये गे मेरे दादा को,

कहे हरीश ने सब कुछ पाया झूम के नाचेंगे मस्ती में,

रे दादा देव का जन्म दिन आया झूम के नाचेंगे मस्ती में ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।