लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां

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॥ पावन पाठ ॥

लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

अरे लूट गई रे लांगुरियां मैं तो लूट गई रे लांगुरियां,

लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

मेरे माथे का टिका उलझ गयो लांगुरियां,

झुमकी पे मारो हाथ रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

मेरे हाथो का कंगन उलझ गयो लांगुरियां,

मुंदरी पे मारो हाथ रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

मेरे कमर की तगड़ी उलझ गई लांगुरियां,

मुठी पे मारो हाथ रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

मेरे पैरो की पयाल उलझ गई लँगूरीया,

बिछुए पे मारो हाथ रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

लांगुरियां धोखे बाज रे रेल में लूट गई रे लांगुरियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।