माता पिता से जनम के साथी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मात पिता से जन्म के साथी रवे से जन्म जन्म के साथी,

समे पे काम ना आवे जितने यार दोस्त सह मात,

मात पिता से जन्म के साथी रवे से जन्म जन्म के साथी,

माँ की ममता पिता का प्यार से,

आज तेरे नही कोठी कार से.

तू ब्रंदंड कपड़ा में रवे पाप की धोती फाटी,

मात पिता से जन्म के साथी रवे से जन्म जन्म के साथी,

ऊँगली पकड़ के चलाना सिखाया आगे का सही मर्ग दिखाया,

मात पिता का बन तू सहारा उन के हाथ की लाठी,

मात पिता से जन्म के साथी रवे से जन्म जन्म के साथी,

उतम छोंके मात पिता और गुरु की शरण में रहवे से,

धन्य धन्य मेरे मात पिता जन्म भूमि की ये माती ,

मात पिता से जन्म के साथी रवे से जन्म जन्म के साथी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।