थारे घट विराज भगवान

पारंपरिक
माँ गंगा भजन गुरुदेव भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

थारा घट में विराजे भगवान्

मंदिर में काई ढूंढती डोले

कोरी मूरत धरी मंदिर में

वो ना मुख से बोले

दरवाजे दरबान खड़ा है

हुकुम करे जद खोले रे

मंदिर में काई ढूंढती डोले

थारा घट में विराजे भगवान्

मंदिर में काई ढूंढती डोले

गगन मंडल से गंगा उतरी

पांचू कपड़ा धो ले

बिन साबन थारो मैल कटे

काया तू निर्मल हो ले रे

मंदिर में काई ढूंढती डोले

थारा घट में विराजे भगवान्

मंदिर में काई ढूंढती डोले

नाथ गुलाब मिल्या गुरु पूरा

घट का पर्दा खोले

भानी नाथ शरण सत गुरु की

राई सूं पर्वत ओले रे

मंदिर में काई ढूंढती डोले

थारा घट में विराजे भगवान्

मंदिर में काई ढूंढती डोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।