जब साई का सिर पे हाथ है तो डरने की क्या बात है

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॥ पावन पाठ ॥

जब साई का सिर पे हाथ है तो डरने की क्या बात है,

साई किरपा से ही तो रोशन जीवन की हर रात है ,

जब साई का सिर पे हाथ है तो डरने की क्या बात है,

सुख दुःख जीवन के दो पहलु ये तो आते जाते है,

पर मेरे साई बाबा सबका सदा ही साथ निभाते है,

साई के भगतो के लिए हर दिन खुशियों की प्रभात है,

जब साई का सिर पे हाथ है तो डरने की क्या बात है,

साई का चिंतन करलो तुम चिंता पास न आएगी,

किरपा करेंगे साई ऐसी हर मुश्किल टल जायेगी

साई का साथ सच्चा जिसने न धोखा न मात है,

जब साई का सिर पे हाथ है तो डरने की क्या बात है,

है किरपालु साई मेरे इनकी किरपा को पा लो तुम,

जो चाहो सो मिलेगा तुम्हे दामन जरा फैला लो तुम.

साई के दर से मन चाही हर मिलती यहाँ सौगात है,

जब साई का सिर पे हाथ है तो डरने की क्या बात है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।