चल चलना है चल तेरी इक ही मंजिल

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॥ पावन पाठ ॥

चल चलना है चल तेरी इक ही मंजिल,

तेरा इक ही माझी तेरा इक ही मौला,

तेरा इक ही मालिक तेरा इक मसीहा,

राह में चाहे आंधी आये चाहे हो अँधेरा,

मन में साई धारण करले हो जाएगा सवेरा,

थम जाएगा चढ़ता तूफ़ान मिल जाएगा साहिल,

चल चलना है चल तेरी इक ही मंजिल

राह में कितने मोड़ मिलेंगे राह में कितनी कलियाँ ,

इन से बच कर चुनते जइयो साई यार की गलियां,

साई दया के बल पर सारे छट जायेगे बादल,

चल चलना है चल तेरी इक ही मंजिल

दुनिया एक छलावा बन कर भटकाए गे तुझको,

चमक धमक से अध् रस्ते में लटकाये गे तुझको,

चिंता क्या जब थाम लियो है तूने साई अंचल,

चल चलना है चल तेरी इक ही मंजिल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।