माँ का मन में ध्यान धरो

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जब भी शुरू कोई काम करो,

माँ का मन में ध्यान धरो,

जो चाहोगे जो पाओगे ऐसा सुबहो शाम करे,

कांटे बिछे जो राहो में छाले पड़े जा पाओ में,

न रुकना कभी न जुकना कभी न कभी छलना दावों में,

माँ की दुआ जो साथ हो हिमत से सब काम करो,

जो चाहोगे जो पाओगे ऐसा सुबहो शाम करे,

पा कर ख़ुशी के सुनहरे पल माँ के मन को न देना छल,

जग में जैसा कर्म करोगे पाओ गे तुम वैसा फल,

माँ के मन को सुख देकर फिर जाके आराम करो ,

जो चाहोगे जो पाओगे ऐसा सुबहो शाम करे,

सुध नहीं जिस प्रेम में नीला वो अस्काश माँ,

दे तन्हाई में साथ माँ तेरी विधि की प्रकाश माँ,

माँ से बड़ा न कोई है उनका तुम समान करो,

जो चाहोगे जो पाओगे ऐसा सुबहो शाम करे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।