वे मैं नचना तेरे नाल जग नू नचान वालेया

श्री बलदेव कृष्ण सेहगल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वे मैं नचना तेरे नाल, जग नू नचान वालेया।

तू वी नच लै अज्ज सादे नाल, जग नू नचान वालेया ॥

नित तू नचावे अज तेनु नाचावंगे,

रुस जेगा ओह ते हत्थ जोड़ के मनावागे,

अज नच के तू करदे नेहाल, जग नू नचान वालेया॥

तन वी है रंगना ते मन वी है रंगना।

अज तेरे नाल श्यामा अंग अंग रंगना।

आजा बंसरी वजा तू साडे नाल, जग नू नचान वालेया॥

जग दी हुण सानू कोई परवाह नहीं,

तेरे जेहा बेड़ियाँ दा कोई वी मलाह नहीं।

भावे डोब जा भावे कर पार, जग नू नचान वालेया॥

अज वी ना नाचेओ ते दस कदो नचेगा।

प्रेमिया दे हाड़ेया तो किना चिर बचेगा।

आना पयेगा हो के दयाल, जग नू नचान वालेया॥

गोपियाँ वी होणगीयां ते ग्वाले वी होणगे।

रल मिल नाल तेरे, रास रचाणगे।

आजा लै के तू राधा जी नू नाल, जग नू नचान वालेया॥

हुण वी ना नाचेओ ते यारी टूट जायेगी।

तेरे नाल श्यामा सारी संगत रूस जाएगी।

ग्वाले रूस जाणगे एह गोपी रूस जायेगी।

आजा नच के तू कर दे कमाल, जग नू नचान वालेया॥

नच ले वे श्यामा हुन कहणु शर्माना ए।

कर के इशार्रे क्यों लुक लुक जान ए,

लुक लुक जान ए ते क्यों तडपाना ए।

जदों मन लिया तेनु अपना यार,जग नू नचान वालेया॥

तूही मेरा यार ते प्यार वी तू है।

दिल वी तू दिलदार वी तू है।

तूही मेरे सर सिरताज वी तू ही है।

तूही मेरा दरद ते दावा भी तू है।

तूही मेरा जिगर ते जान वी तू है।

आज नच के ते देदे प्यार, जग नू नचान वालेया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।