बाबो धोरा माही देखों रोनक लगाई

रवि आदिवाल
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॥ पावन पाठ ॥

अजब गजब है लीला बाबे री, जावें ना सुनाई ,

बाबो धोरा माही देखों रोनक लगाई ,

भादुअ री दुज रो बाबो ,ले अवतार है आयो ,

भगता रा दुखड़ा मितावन,रुनिचो धाम बसायो ,

मैना देरा कंवर लाडला ,डाली सुगना रा भाई ,

बाबो धोरा माही देखों रोनक लगाई ,

आधलिया नै आंख्या बाबो ,को ढीया नै काया ,

नि पुत्रा नै लाल देवै बाबो ,निर धनिया नै धन माया,

भर भर झोलिया बांट सबनै ,तु भी जागै भराई,

बाबो धोरा माही देखों रोनक लगाई ,

जग मग जग मग चमकै देवरो , उचै धोरा ऊपर

भगता नै निहाल करै बाबो , बैठ यो देवरै अन्दर

आदिवाल तो कारयो नजरों , स्वर्ग रो रुनिचे माई

बाबो धोरा माही देखों रोनक लगाई ,

लेखक- रवि आदिवाल

संगीत- Nr beats

गायक- सेठी सागर

सपना रिकॉर्ड राजस्थानी

8386854165

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।