बाबे रा लाडला चाल्या बाबे रै

रवि आदिवाल
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॥ पावन पाठ ॥

बाबे रा लाडला चाल्या बाबे रै दरबार कोर्स ,

नाचैता गाता , धुम मचाता , करता जय जयकार,

बाबे रा लाडला चाल्या बाबे रै दरबार,

रल मिल सग्ला संघ बनायो,

बाबो सगला नै रूणिचे बुलायो ,

बाबो सगला नै,लिख लिख भेजया,आवन खातिर तार ,

बाबे रा लाडला चाल्या बाबे रै दरबार,

भादुअ रो मेलो आयो,

सगला रो है मन हर्षा यो ,

छोडगै साग्ला , चाल पड़ाया है , अपनों घर और बार,

पदमपुर गो ओ संग निरालो,

चाल्यो " आदिवाल " सगला थे चालो,

भजन गांवतो ,चाल म्हारे सागै संजू तू इसबार

बाबे रा लाडला......

लेखक- रवि आदिवाल

संगीत- Nr beats

गायक- संजय गुनेजा

सपना रिकॉर्ड राजस्थानी

8386854165

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।