आया है तू यहाँ से जाना ही पडेगा

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॥ पावन पाठ ॥

आया है तू यहाँ से तो जाना ही पडेगा,

जो दुःख दिया दुःख तुझे पाना ही पड़ेगा,

आया है तू यहाँ से जाना ही पडेगा

जन्म जब लिया तो खुशिया है तेरे घर में

दुनिया के रिश्ते तेरे वसने लगे मन में,

तू हु बड़ा तो एहंकार हो गया ,

दुनिया की नफरत का तू शिकार हो गया,

नाते रिश्ते तुझको बुलाना ही पड़े गा,

आया है तू यहाँ से जाना ही पडेगा

फिर याहा इक दिन तेरा परिवार हो गया ,

फिर नइ दुनिया से तुझे प्यार हो गया,

जैसी करनी तू करे वैसा ही अब भरे,

तेरे बचे भी है तुझे छोड़ कर चले,

कभी रोना तो कभी गाना भी पड़े गा,

आया है तू यहाँ से जाना ही पडेगा

आया भूड़ापा तेरे माँ बाप के जैसा,

सबक मिला तुझको वही तूने किया जैसा ,

कर्म भी किया करि है खूब कमाई,

तेरी ही संतान तेरे काम ना आई,

दुनिया से मुँह मोड़ के जान ही पड़े गा,

आया है तू यहाँ से जाना ही पडेगा

हो गई तयारी तेरी टोली मुसाफिर,

कुछ नहीं बचा तेरा इस दुनिया में आखिर,

दुनिया को कदमो से नापने वाले तू सो गया बुल कर के तू प्यार ये गठ में

कभी रोना तो कभी गाना भी पड़े गा,

आया है तू यहाँ से जाना ही पडेगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।