तेरा कोई नहीं मेरा कोई नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

क्या लेकर दुनिया में आया क्या खोया क्या तुमने पाया,

तेरा कोई नहीं,मेरा कोई नहीं

आया जहां में तूने पैसा कमाया गफलत में आकर ये जीवन बिताया,

पैसा ये किस का है ये कौन जाने जाए न पर तेरे दोलत खजाने,

तेरा कोई नहीं,मेरा कोई नहीं

ना जाने कितने है आते और जाते

यही पे आते बनते रिश्ते और नाते,

खोजने पीने में ना ये जीवन बिताओ,

सुमिरन भजन में ले जरा मन लगाओ,

तेरा कोई नहीं,मेरा कोई नहीं

जब तेरी दुनिया से होगी बिदाई,

कोई न देगा तुझे पाना दिखाई,

बांस की छइया पे तुम को सुलाया,

राम नाम सत्ये है सभी ने यही गया,

तेरा कोई नहीं,मेरा कोई नहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।