करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

सोने के लोटा गंगा जल पानी माई दोही बिरहा,

अतर चढ़े दो दो शीशियाँ मई दोई विरिया,

करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

लाये नन्द मन से फुलवा माई दोई बिरहा,

हार बनाये चुन चुन कलियाँ मई दोई विरिया,

करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

पान सुपारी मैया ध्वजा नारियल दोई बिरहा,

धुप कपूर चढ़ी चुनियाँ मई दोई विरिया,

करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

लाल बरन शृंगार करे माई दोई विरहा,

मेवा खीर सजी थरियाँ मई दोई विरिया,

करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

पांच भगत मिल यश तेरे गावे मई दोई विरिया,

गोपुटेश्वर की पीड़ हरो मई दोई विरिया,

काटो विपत की भाई जरियाँ मई दोई विरिया,

करे भगत हो आरती मई दोई विरिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।