राधे राधे जपे जा सुबहो शाम बीरज की गलियों में

सौरभ मधुकर
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे राधे श्याम मिलादे...

राधे राधे श्याम मिलादे...

राधे राधे जपे जा सुबहो शाम बीरज की गलियों में,

चाहे ढल जाए जीवन की शाम बीरज की गलियों में,

वृन्दावन को छोड़ कन्हैया दूर कभी ना जावे,

जो गावे श्री राधे राधे वाके संग हो जावे,

मुरली कान्हा की बाजे आठों याम,

बीरज की गलियों में,

राधे राधे जपे जा सुबहो शाम बीरज की गलियों में |

जिसकी मर्जी के बिन जग में पत्ता ना हिल पावे,

धरती का चप्पा चप्पा जिसकी रचना कहलावे,

उसे कहते हैं राधे का गुलाम,

बीरज की गलियों में,

राधे राधे जपे जा सुबहो शाम वीरज की गलियों में |

जिसने ब्रज को देखा उसने बातें हैं ये मानी,

यमुना यम को दूर करे,भव तारे राधे रानी,

कण-कण में है चारो धाम,

बीरज की गलियों में,

राधे राधे जपे जा सुबहो शाम वीरज की गलियों में |

सूरज ब्रज के कण कण में बस राधे राधे गूंजे,

भूल के सारी दुनिया जो राधे चरणों को पूजे,

उन्हें मिल जाता है घनश्याम,

बीरज की गलियों में,

राधे राधे जपे जा सुबहो शाम वीरज की गलियों में |

राधे राधे श्याम मिलादे...

राधे राधे श्याम मिलादे...

राधे राधे जपे जा सुबहो शाम बीरज की गलियों में,

चाहे ढल जाए जीवन की शाम बीरज की गलियों में ||

भजन गायक - सौरभ मधुकर

प्रस्तुतकर्ता - संस्कार टी.वि.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।