ना जाने किस कसूर की दी है मुझे सज़ा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना जाने किस कसूर की दी है मुझे सज़ा,

जिंदगी यही है तो है जिंदगी में क्या,

बदल अगर गरज रहे बिजली से डर है क्या,

जिंदगी यही है तो है जिंदगी में क्या,

आज ये जीवन मेरा बाबा दुःख में गिरा हुआ है,

कैसे बताओ बाबा तुह्मसे कुछ न छुपा हुआ है,

रेत के जैसी मेरी जिंगदी यही फिसल रही है,

दुःख ही दुःख है दमन में खुशियों की बहुत कमी है,

मेरे मालिक इस कसूर की दी है मुझे सजा,

जिंदगी यही है तो है जिंदगी में क्या,

रोती रही है आँखे मेरी पर ओरो को हसाया,

मैं क्या जानू उनके दिल में किता पाप समाया,

आज ये जाना अपने पराये कितने बदल गए है,

ना जाने अपने जीवन में कितने सितम सहे है,

मेरे बाबा किस कसूर की दी है मुझे सजा,

जिंदगी यही है तो है जिंदगी में क्या,

मेरे इस जीवन की बाबा बस इतनी सी कहानी,

आँखों के आंसू नहीं रुकते ये कैसी जिंदगी,

जिसको लहू से सींचा वो परिवार उजड़ रहा है,

माला टूट रही है तिनका तिनका बिखर रहा है,

मेरे बाबा किस कसूर की दी है मुझे सजा,

जिंदगी यही है तो है जिंदगी में क्या,

जिनके लिए जीती है दुनिया वो ही बिखर रहे है,

मेरी इन आँखों के सपने इक इक टूट रहे है,

इतने बड़े जहां में बाबा तुमसे आस बची है ,

राजेश महांवार की तो बाबा दुनिया तुमपे टिकी है,

मेरे बाबा किस कसूर की दी है मुझे सजा,

जिंदगी यही है तो है जिंदगी में क्या,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।