श्रद्धा से तेरी आरती गाये मैय्या शाकुम्भरी

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

श्रद्धा से तेरी आरती गाये मैय्या शाकुम्भरी

अंबे शाकुम्भरी....

देवों ने तुझको जब था बुलाया

पलभर मे उनका कष्ट मिटाया

देवों ने तुझको जब था बुलाया

पलभर मे उनका कष्ट मिटाया

कुंदन हमारी कर देना काया

मैय्या शाकुम्भरी अंबे शाकुम्भरी

बलशाली माता दुर्बल को बल दो

आत्मा है प्यासी करुणा का जल दो

बलशाली माता दुर्बल को बल दो

आत्मा है प्यासी करुणा का जल दो

खुशियों का हमको भी कोई पल दो

मैय्या शाकुम्भरी अंबे शाकुम्भरी

हम मूढ़ नादान रस्ता दिखा दो

अंधकार मे दिव्य ज्योति जगा दो

हम मूढ़ नादान रस्ता दिखा दो

अंधकार मे दिव्य ज्योति जगा दो

सोये हमारे भाग्य जगा दो

मैय्या शाकुम्भरी अंबे शाकुम्भरी

भूखों को भोजन तुमने दिया है

भक्तों ने हर सुख तुमसे लिया है

भूखों को भोजन तुमने दिया है

भक्तों ने हर सुख तुमसे लिया है

उद्धार सबका तुमने किया है

मैय्या शाकुम्भरी अंबे शाकुम्भरी

ममता के आंचल से सबको ढकना

सबको ही अपनी छाया मे रखना

ममता के आंचल से सबको ढकना

सबको ही अपनी छाया मे रखना

तेरी दया का रस हमने चखना

मैय्या शाकुम्भरी अंबे शाकुम्भरी

सारी ही सृष्टि को पालती हो

गिरते हुओं को संभालती हो

सारी ही सृष्टि को पालती हो

गिरते हुओं को संभालती हो

घड़ियाँ मुसीबत की टालती हो

मैय्या शाकुम्भरी अंबे शाकुम्भरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।