सीता के राम थे रखवाले जब हरण हुआ तब कोई नहीं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सीता के राम थे रखवाले जब हरण हुआ तब कोई नहीं ,

दोप्दी की पांचो पांडव थे जब चीर हरण तब कोई नहीं,

दसरथ के चार दुलारे थे जब प्राण तजे कब कोई नहीं,

रावण भी बड़े शक्तिशाली थे जब लंका जली तब कोई नहीं,

श्री कृष्ण सुदर्शन धारी थे जब तीर चुबा तब कोई नहीं,

लक्ष्मण जी भी भारी योद्धा थे जब शक्ति लगी तब कोई नहीं,

सिर सइयां पे पड़े पितामा थे पीड़ा का सांझी कोई नहीं,

अभिमन्यु राज दुलारे थे पर चक्रविहु में कोई नहीं,

सच है ये दविंदर दुनिया वाले संसार में अपना कोई नहीं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।