साई नाम साई नाम जय जय साई नाम

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जिस को चाहिए वो साई जी से मांग ले,

जिस ने ही मानेगा मिला उसको जरूर है,

तू क्यों न मांगे ये तो तेरा ही कसूर है,

साई नाम साई नाम जय जय साई नाम,

साई सब की जाने तू भी कह से कुछ बोल के,

दिल वाले भेद रखोगे इनके खोल के,

हल होंगे जो भी तेरे मसले तमाम है,

पल में बना दे साई बिगड़ी काम है,

पास है वो तेरे तू ही इक उन से दूर से है,

तू क्यों न मांगे ये तेरा ही कसूर है,

साई नाम साई नाम जय जय साई नाम,

साई जी के चरणों में लगाया कर अर्जी,

कब किसे वो क्या देदे आगे इनकी मर्जी,

साई जी का होजा छोड़ जूठी खुदगर्जी,

सच का तराजू है ये दर नहीं फर्जी,

काम वही होगा जो उनको मंजुर है,

तू क्यों न मांगे ये तेरा ही कसूर है,

साई नाम साई नाम जय जय साई नाम,

बादशाह बना दे साई राह के फ़कीर को,

पल में बदल डाले हाथो की लकीर को,

फूलो की बना दे डाली देखे शमशीर को,

कैदी को रिहाई देदे काटे जंजीर को,

राज इसका जलवा इसका ही नूर है

तू क्यों न मांगे ये तेरा ही कसूर है,

साई नाम साई नाम जय जय साई नाम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।