मेरे दिल में रहने वाले मुझसे नकाब क्यों

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल में रहने वाले मुझसे नकाब क्यों,

इतना मुझे बतादे मुझसे छुपा है क्यों,

मेरे दिल में रहने वाले मुझसे नकाब क्यों,

क्यों निष् बल दाती के बीत गये हम हार गये तुम जीत गये,

पट खोल उजारन आई है तेरे द्वार पड़े युग बीत गये,

मैंने तो ये सुना तुम हो दया के सागर,

लाखो को तूने तारा मुझसे जवाब क्यों,

मेरे दिल में रहने वाले मुझसे नकाब क्यों,

मेरे इस दिल की उजड़ी बस्ती में आप आते तो पाप क्यों आते,

जिस बस्ती में आप नहीं बस्ते उस बस्ती में पाप बस्ते है,

मेरे गुनाह है लाखो ये भी तो मैंने माना,

ओरो से कुछ न पूछा मुझे हिसाब क्यों,

मेरे दिल में रहने वाले मुझसे नकाब क्यों,

दिल दियाँ ये मेरे इतवार की हद थी जान दी ये मेरे प्यार की हद थी,

मर गये हम खुली रहे आंखे ये तेरे इंतज़ार की हद थी ,

तूने जिसको भी अपनाया उसको खुदा बनाया,

उसका नसीब अच्छा मेरा खराब क्यों,

मेरे दिल में रहने वाले मुझसे नकाब क्यों,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।