मैंने जब से मेरे सांवरियां गुण गान तुम्हरा गाया है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैंने जब से मेरे सांवरियां गुण गान तुम्हरा गाया है,

तब से जीवन के हर पथ पे मैंने साथ तुम्हारा पाया है,

मेरे बाबा मेरे बाबा,

कभी अंधेरो में मेरे बाबा मेरा मन जब गबराता है,

मन की रोशनी पूरी हो राहो में बिखर जाता है,

तेरे बिना मुझको बाबा ये सुख भी नहीं भाता है,

तू संग है तो गम में भी मेरा दिल ये मुश्काता है,

वीराने जीवनमे शहनाई भजति है,

कांटो सी राहे भी फूलो सी लगती है ,

अगर तू साथ है,

फ़िक्र क्यों करू क्यों किसी से डरु अगर तू साथ है,

जो कुछ मुझ में प्यारा है बाबा वो असर तुम्हारा है,

सब तेरी किरपा सब तेरी मेहर सोनू जो कुछ बन पाया है,

मैंने जब से मेरे सांवरियां गुण गान तुम्हरा गाया है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।